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INDIA HISTORY

भारत                                                                           

 

भारत, पौराणिक जम्बूद्वीप, आधुनिक दक्षिण एशिया में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा देश है। भारत का भौगोलिक फैलाव ८० ४' से ३७० ६' उत्तरी अक्षांश तक तथा ६८० ७' से ९७० २५'पूर्वी देशान्तर तक है। भारत का विस्तार उत्तर से दक्षिण तक कि. मी. और पूर्व से पश्चिम तक २,९३३ कि. मी. है। भारत की समुद्र तट रेखा ७५१६.६ किलोमीटर लम्बी है। भारत, भौगोलिक दृष्टि से विश्व में सातवाँ सबसे बड़ा और जनसँख्या के दृष्टिकोण से दूसरा सब से बड़ा देश है। भारत के पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर-पूर्व में चीन, नेपाल, और भूटान और पूर्व में बांग्लादेश और म्यान्मार देश स्थित हैं। हिन्द महासागर में इसके दक्षिण पश्चिम में मालदीव, दक्षिण में श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व में इंडोनेशिया हैं। उत्तर-पश्चिम में अफ़गानिस्तान के साथ भारत की सीमा है। इसके उत्तर में हिमालय पर्वत है और दक्षिण में हिन्द महासागर है। पूर्व में बंगाल की खाड़ी है तथा पश्चिम में अरब सागरसमुद्र हैं । भारत में कई बड़ी नदियाँ हैं । गंगा नदी भारतीय संस्कृति में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। अन्य बड़ी नदियाँ सिन्धु, नर्मदा, ब्रह्मपुत्र, यमुना,गोदावरी, कावेरी, कृष्णा, चम्बल, सतलज, व्यास आदि हैं।

 

यह विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यहाँ ३०० से अधिक भाषाएँ बोली जाती हैं । यह विश्व की कुछ प्राचीनतम सभ्यताओं की जननी रहा है जैसे - सिन्धु घाटी सभ्यता, और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व्यापार पथों का अभिन्न अंग भी. विश्व के चार प्रमुख धर्म : सनातन-हिन्दू, बौद्ध, जैन तथा सिख भारत में ही जन्मे और विकसित हुए।

 

भारत भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा राष्ट्र है। भारत की राजधानी नई दिल्ली है। भारत के अन्य बड़े महानगर मुम्बई (बम्बई), कोलकाता (कलकत्ता) और चेन्नई (मद्रास) हैं। १९४७ में स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व ब्रिटिश भारत के रूप में ब्रिटिश साम्राज्य के प्रमुख अंग भारत ने विगत २० वर्ष में सार्थक प्रगति की है, विशेष रूप से आर्थिक और भारतीय सेना एक क्षेत्रीय शक्ति और विश्वव्यापक शक्ति है। भारत विश्व की दसवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। हाल के वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था ने बहुत प्रगति की है, और ताज़ा स्थिति में भारत विश्व में तीसरे-चौथे स्थान पर होने का दावा करता है ।

 

भारत के दो आधिकारिक नाम हैं- हिन्दी में भारत और अंग्रेज़ी में इण्डिया (India)। इण्डिया नाम की उत्पत्ति सिन्धु नदी के अंग्रेजी नाम "इण्डस" से हुई है। भारत नाम, एक प्राचीन हिन्दू सम्राट भरत जो कि मनु के वंशज ऋषभदेव के ज्येष्ठ पुत्र थे तथा जिनकी कथा श्रीमदभागवत महापुराण में है, के नाम से लिया गया है। भारत (भा + रत) शब्द का मतलब है आन्तरिक प्रकाश या विदेक-रूपी प्रकाश में लीन। एक तीसरा नाम हिन्दुस्तान भी है जिसका अर्थ हिन्द(हिन्दू) की भूमि होता है जो कि प्राचीन काल ऋषियों द्वारा दिया गया था। प्राचीन काल में यह कम प्रयुक्त होता था तथा कालान्तर में अधिक प्रचलित हुआ विशेषकर अरब/ईरान में। भारत में यह नाम मुगल काल से अधिक प्रचलित हुआ यद्यपि इसका समकालीन उपयोग कम और प्रायः उत्तरी भारत के लिए होता है। इसके अतिरिक्त भारतवर्ष को वैदिक काल से आर्यावर्त "जम्बूद्वीप" और "अजनाभदेश" के नाम से भी जाना जाता रहा है। बहुत पहले यह देश 'सोने की चिड़िया' के रूप में जाना जाता था।

 

भारत को एक सनातन राष्ट्र माना जाता है क्योंकि यह मानव-सभ्यता का पहला राष्ट्र था। श्रीमद्भागवत के पञ्चम स्कन्ध में भारत राष्ट्र की स्थापना का वर्णन आता है।

 

भारतीय दर्शन के अनुसार सृष्टि उत्पत्ति के पश्चात ब्रह्मा के मानस पुत्र स्वयंभू मनु ने व्यवस्था सम्भाली। इनके दो पुत्र, प्रियव्रत और उत्तानपाद थे। उत्तानपाद भक्त ध्रुव के पिता थे। इन्हीं प्रियव्रत के दस पुत्र थे। तीन पुत्र बाल्यकाल से ही विरक्त थे। इस कारण प्रियव्रत ने पृथ्वी को सात भागों में विभक्त कर एक-एक भाग प्रत्येक पुत्र को सौंप दिया। इन्हीं में से एक थे आग्नीध्र जिन्हें जम्बूद्वीप का शासन कार्य सौंपा गया। वृद्धावस्था में आग्नीध्र ने अपने नौ पुत्रों को जम्बूद्वीप के विभिन्न नौ स्थानों का शासन दायित्व सौंपा। इन नौ पुत्रों में सबसे बड़े थे नाभि जिन्हें हिमवर्ष का भू-भाग मिला। इन्होंने हिमवर्ष को स्वयं के नाम अजनाभ से जोड़ कर अजनाभवर्ष प्रचारित किया। यह हिमवर्ष या अजनाभवर्ष ही प्राचीन भारत देश था। राजा नाभि के पुत्र थे ऋषभ। ऋषभदेव के सौ पुत्रों में भरत ज्येष्ठ एवं सबसे गुणवान थे। ऋषभदेव ने वानप्रस्थ लेने पर उन्हें राजपाट सौंप दिया। पहले भारतवर्ष का नाम ॠषभदेव के पिता नाभिराज के नाम पर अजनाभवर्ष प्रसिद्ध था। भरत के नाम से ही लोग अजनाभखण्ड को भारतवर्ष कहने लगे।

 

पाषाण युग भीमबेटका मध्य प्रदेश की गुफाएँ भारत में मानव जीवन का प्राचीनतम प्रमाण हैं । प्रथम स्थाई बस्तियों ने ९००० वर्ष पूर्व स्वरुप लिया। यही आगे चल कर सिन्धु घाटी सभ्यता में विकसित हुई, जो २६०० ईसा पूर्व और १९०० ईसा पूर्व के मध्य अपने चरम पर थी। [3] लगभग १६०० ईसा पूर्व आर्य भारत आए और उन्होंने उत्तर भारतीय क्षेत्रों में वैदिक सभ्यता का सूत्रपात किया। इस सभ्यता के स्रोत वेद और पुराण हैं। किन्तु आर्य-आक्रमण-सिद्धांत अभी तक विवादस्पद है। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक सहित कुछ विद्वानों की मान्यता यह है कि आर्य भारतवर्ष के ही स्थायी निवासी रहे हैं तथा वैदिक इतिहास करीब ७५,००० वर्ष प्राचीन है।[4] इसी समय दक्षिण भारत में द्रविड़ सभ्यता का विकास होता रहा। दोनों जातियों ने एक दूसरे की खूबियों को अपनाते हुए भारत में एक मिश्रित-संस्कृति का निर्माण किया।

५०० ईसवी पूर्व कॆ बाद कई स्वतंत्र राज्य बन गए। भारत के प्रारम्भिक राजवंशों में उत्तर भारत का मौर्य राजवंश उल्लेखनीय है जिसके प्रतापी सम्राट अशोक का विश्व इतिहास में विशेष स्थान है।[5] १८० ईसवी के आरम्भ से मध्य एशिया से कई आक्रमण हुए, जिनके परिणामस्वरूप उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप में यूनानी, शक, पार्थी और अंततः कुषाण राजवंश स्थापित हुए। तीसरी शताब्दी के आगे का समय जब भारत पर गुप्त वंश का शासन था,भारत का "स्वर्णिम काल" कहलाया।"[6][7] दक्षिण भारत में भिन्न-भिन्न काल-खण्डों में कई राजवंश चालुक्य, चेर, चोल, पल्लव तथा पांड्य रहे । ईसा के आसपास संगम-साहित्य अपने चरम पर था, जिसमें तमिळ भाषा का परिवर्धन हुआ । सातवाहनों और चालुक्यों ने मध्य भारत में अपना वर्चस्व स्थापित किया । विज्ञान, कला, साहित्य, गणित, खगोलशास्त्र,प्राचीन प्रौद्योगिकी, धर्म, तथा दर्शन इन्हीं राजाओं के शासनकाल में फले-फूले ।

 

१२वीं शताब्दी के प्रारंभ में, भारत पर इस्लामी आक्रमणों के पश्चात, उत्तरी व केन्द्रीय भारत का अधिकांश भाग दिल्ली सल्तनत के शासनाधीन हो गया; और बाद में, अधिकांश उपमहाद्वीप मुगल वंश के अधीन। दक्षिण भारत में विजयनगर साम्राज्य शक्तिशाली निकला। हालाँकि, विशेषतः तुलनात्मक रूप से, संरक्षित दक्षिण में अनेक राज्य शेष रहे,अथवा अस्तित्व में आये। मुगलों के संक्षिप्त अधिकार के बाद सत्रहवीं सदी में दक्षिण और मध्य भारत में मराठों का उत्कर्ष हुआ। उत्तर पश्चिम में सिक्खों की शक्ति में वृद्धि हुई।

१७वीं शताब्दी के मध्यकाल में पुर्तगाल, डच, फ्रांस, ब्रिटेन सहित अनेक यूरोपीय देशों, जो भारत से व्यापार करने के इच्छुक थे, उन्होंने देश की आतंरिक शासकीय अराजकता का फायदा उठाया अंग्रेज दूसरे देशों से व्यापार के इच्छुक लोगों को रोकने में सफल रहे और १८४० तक लगभग संपूर्ण देश पर शासन करने में सफल हुए। १८५७ में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी के विरुद्ध असफल विद्रोह, जो भारतीय स्वतन्त्रता के प्रथम संग्राम से भी जाना जाता है, के बाद भारत का अधिकांश भाग सीधे अंग्रेजी शासन के प्रशासनिक नियंत्रण में आ गया।

 

कोणार्क-चक्र - १३वीं शताब्दी में बने उड़ीसा के सूर्य मन्दिर में स्थित, यह दुनिया के सब से प्रसिद्घ ऐतिहासिक स्मारकों में से एक है।

 

बीसवी सदी के प्रारम्भ में आधुनिक शिक्षा के प्रसार और विश्वपटल पर बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के चलते भारत में एक बौद्धिक आन्दोलन का सूत्रपात हुआ जिसने सामाजिक और राजनीतिक स्तरों पर अनेक परिवर्तनों एवम आन्दोलनों की नीव रखी। १८८५ में इन्डियन नेशनल कांग्रेस काँग्रेस पार्टी की स्थापना ने स्वतन्त्रता आन्दोलन को एक गतिमान स्वरूप दिया। बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में लम्बे समय तक स्वतंत्रता प्राप्ति के लिये विशाल अहिंसावादी संघर्ष चला, जिसका नेतृत्‍व महात्मा गांधी, जो आधिकारिक रुप से आधुनिक भारत के 'राष्ट्रपिता' के रूप में संबोधित किये जाते हैं, ने किया। इसके साथ-साथ चंद्रशेखर आजाद, सरदार भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, वीर सावरकर आदि के नेतृत्‍व मे चले क्रांतिकारी संघर्ष के फलस्वरुप १५ अगस्त, १९४७ भारत ने अंग्रेजी शासन से पूर्णतः स्वतंत्रता प्राप्त की। तदुपरान्त २६ जनवरी, १९५० को भारत एक गणराज्य बना।

 

एक बहुजातीय तथा बहुधार्मिक राष्ट्र होने के कारण भारत को समय-समय पर साम्प्रदायिक तथा जातीय विद्वेष का शिकार होना पड़ा है। क्षेत्रीय असंतोष तथा विद्रोह भी हालाँकि देश के अलग-अलग हिस्सों में होते रहे हैं, पर इसकी धर्मनिरपेक्षता तथा जनतांत्रिकता, केवल १९७५-७७ को छोड़, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा कर दी थी, अक्षुण्ण रही है।

 

भारत के पड़ोसी राष्ट्रों के साथ अनसुलझे सीमा विवाद हैं। इसके कारण इसे छोटे पैमानों पर युद्ध का भी सामना करना पड़ा है। १९६२ में चीन के साथ, तथा १९४७, १९६५, १९७१ एवम् १९९९ में पाकिस्तान के साथ लड़ाइयाँ हो चुकी हैं।

 

भारत गुटनिरपेक्ष आन्दोलन तथा संयुक्त राष्ट्र संघ के संस्थापक सदस्य देशों में से एक है।

 

१९७४ में भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण किया था जिसके बाद १९९८ में ५ और परीक्षण किये गये। १९९० के दशक में किये गये आर्थिक सुधारीकरण की बदौलत आज देश सबसे तेज़ी से विकासशील राष्ट्रों की सूची में आ गया है।

 

 

 

भारत का संविधान भारत को एक सार्वभौमिक, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतान्त्रिक गणराज्य की उपाधि देता है। भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य है, जिसका द्विसदनात्मक संसद वेस्टमिन्स्टर शैली के संसदीय प्रणाली द्वारा संचालित है। इसके शासन में तीन मुख्य अंग हैं: न्यायपालिका, कार्यपालिका और व्यवस्थापिका।

 

राष्ट्रपति,जो राष्ट्र का प्रमुख है, की भूमिका अधिकतर आनुष्ठानिक ही है। उसके दायित्वों में संविधान का अभिव्यक्तिकरण, प्रस्तावित कानूनों (विधेयक) पर अपनी सहमति देना, और अध्यादेश जारी करना प्रमुख हैं । वह भारतीय सेनाओं का मुख्य सेनापति भी है। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति को एक अप्रत्यक्ष मतदान विधि द्वारा ५ वर्षों के लिये चुना जाता है। प्रधानमन्त्री सरकार का प्रमुख है और कार्यपालिका की सारी शक्तियाँ उसी के पास होती हैं। इसका चुनाव राजनैतिक पार्टियों या गठबन्धन के द्वारा प्रत्यक्ष विधि से संसद में बहुमत प्राप्त करने पर होता है। बहुमत बने रहने की स्थिति में इसका कार्यकाल ५ वर्षों का होता है। संविधान में किसी उप-प्रधानमंत्री का प्रावधान नहीं है पर समय-समय पर इसमें फेरबदल होता रहा है।

 

व्यवस्थापिका संसद को कहते हैं , जिसके दो सदन हैं - उच्चसदन राज्यसभा, अथवा राज्यपरिषद्, और निम्नसदन लोकसभा. राज्यसभा में २४५ सदस्य होते हैं जबकि लोकसभा में ५५२। राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव, अप्रत्यक्ष विधि से ६ वर्षों के लिये होता है, जब कि लोकसभा के सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष विधि से, ५ वर्षों की अवधि के लिये। १८ वर्ष से अधिक उम्र के सभी भारतीय नागरिक मतदान कर सकते हैं।

 

कार्यपालिका के तीन अंग हैं - राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और मंत्रिमंडल। मंत्रिमंडल का प्रमुख प्रधानमंत्री होता है। मंत्रिमंडल के प्रत्येक मंत्री को संसद का सदस्य होना अनिवार्य है। कार्यपालिका, व्यवस्थापिका से नीचे होता है।

 

भारत की स्वतंत्र न्यायपालिका का शीर्ष सर्वोच्च न्यायालय है, जिसका प्रधान प्रधान न्यायाधीश होता है। सर्वोच्च न्यायालय को अपने नये मामलों तथा उच्च न्यायालयों के विवादों, दोनो को देखने का अधिकार है। भारत में २१ उच्च न्यायालय हैं, जिनके अधिकार और उत्तरदायित्व सर्वोच्च न्यायालय की अपेक्षा सीमित हैं। न्यायपालिका और व्यवस्थापिका के परस्पर मतभेद या विवाद का सुलह राष्ट्रपति करता है।

 

 

 

बहुदलीय राजनीतिक व्यवस्था वाले इस देश में ६ राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक दल हैं किंतु यहां की राजनीतिक व्यवस्था पर सर्वाधिक प्रभावी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस रही है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में उसकी सरकार मुख्य रूप से भारतीय राष्ट्रीय कान्ग्रेस पार्टी के हाथ में रही है। स्वतंत्रतापूर्व भारत में सबसे बडे़ राजनीतिक संगठन होने के कारण काँग्रेस की,जिसका नेता मूल रूप से नेहरू - गाँधी परिवार का कोई न कोई सदस्य होता है, चालीस वर्षों तक राष्ट्रीय राजनीति में प्रमुख भूमिका रही। १९७७ में, पूर्व काँग्रेस शासन की इंदिरा गाँधी के आपातकाल लगाने के बाद एक संगठित विपक्ष जनता पार्टी ने चुनाव जीता और उसने अत्यधिक छोटी अवधि के लिये एक गैर-काँग्रेसी सरकार बनाई।

 

१९९६ में, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), सबसे बड़े राजनीतिक संगठन के रूप में उभरी और उसने काँग्रेस के आगे इतिहास में पहली बार एक ठोस विपक्ष प्रस्तुत किया। परन्तु आगे चल कर सत्ता वास्तविक रूप से दो गठबन्धन सरकारों के हाथ में रही, जिन्हें काँग्रेस का सम्पूर्ण समर्थन था। १९९९ में, भाजपा ने छोटे दलों को साथ लेकर राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबन्धन (राजग) बनाया और ५ वर्षों तक कार्यकाल पूरा करने वाली वह पहली गैर-काँग्रेसी सरकार बनी। १९९९ से पूर्व का दशक अल्पावधि सरकारों का था, इन वर्षों में सात भिन्न सरकारें बनी। परन्तु १९९९ मे बनी राजग सरकार ने अपना ५ वर्ष का कार्यकाल पूरा किया और कई आर्थिक सुधार लाई।

 

भारतीय आम चुनाव २००४ के फ़लस्वरूप काँग्रेस दल ने सर्वाधिक सीटें जीतीं और वह बड़े ही कम बहुमत से सत्ता में वापस आई। काँग्रेस ने गठजोड़ द्वारा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और बहुत सी राज्य स्तरीय पार्टियों को साथ लेकर यूनाईटेड प्रोग्रेसिव अलायन्स (यूपीए) नामक सरकार बनाई। आज बीजेपी और उसके सहयोगी विपक्ष में मुख्य भूमिका निभाते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर किसी विशेष पार्टी का दबदबा न होने और राज्य स्तर की कई पार्टियों के राष्ट्रीय स्तर पर उभरने के कारण १९९६ से बनी सभी सरकारों को राजनीतिक गठबन्धनों की आवश्यकता पड़ी है।

 

 

 

1947 में अपनी स्वतंत्रता के बाद से, भारत के ज्यादातर देशों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखा है. 1950 के दशक में, यह दृढ़ता से अफ्रीका और एशिया में यूरोपीय कालोनियों की स्वतंत्रता का समर्थन किया और गुट निरपेक्ष आंदोलन में एक अग्रणी भूमिका निभाई. देर से 1980 के दशक में भारत पड़ोसी के आमंत्रण पर दो संक्षिप्त सैन्य हस्तक्षेप किया देशों, मालदीव में एक श्रीलंका और अन्य, ऑपरेशन कैक्टस में भारतीय शांति सेना के द्वारा. हालांकि, भारत के पड़ोसी पाकिस्तान के साथ एक तनाव संबंध पड़ा है, और दोनों देशों को युद्ध के लिए चार बार चला गया है, 1947 में, 1965, 1971 और 1999. कश्मीर विवाद इन युद्धों के प्रमुख कारण था, 1971 में छोड़कर जो तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में नागरिक अशांति के बाद 1962 के भारत - चीन युद्ध और पाकिस्तान के साथ 1965 के युद्ध के बाद भारत के करीब सैन्य और आर्थिक विकास दीं. सोवियत संघ के साथ संबंधों, देर से 1960 के दशक से, सोवियत संघ भारत का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरी थी.

 

आज रूस के साथ सामरिक संबंधों को जारी रखने के अलावा, भारत विस्तृत इजरायल और फ्रांस के साथ रक्षा संबंधों लेकर है. हाल के वर्षों में, भारत में क्षेत्रीय सहयोग और विश्व व्यापार संगठन के लिए एक दक्षिण एशियाई एसोसिएशन में प्रभावशाली भूमिका निभाई है. राष्ट्र सैन्य और पुलिस कर्मियों को चार महाद्वीपों भर में पैंतीस संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सेवा प्रदान की है. भारत भी विभिन्न बहुपक्षीय मंचों, सबसे खासकर पूर्वी एशिया शिखर बैठक और जी -8 5 में एक सक्रिय भागीदार आर्थिक क्षेत्र में भारत दक्षिण अमेरिका, एशिया के विकासशील देशों के साथ घनिष्ठ संबंध है और अफ्रीका. के बारे में एक दशक के लिए अब भारत भी एक "पूर्व की ओर देखो नीति 'जो मदद की है यह आसियान देशों के साथ अपनी भागीदारी को मजबूत बनाने के मुद्दों की एक विस्तृत श्रृंखला पर जापान और दक्षिण कोरिया, लेकिन विशेष रूप से आर्थिक निवेश और क्षेत्रीय सुरक्षा का प्रयास किया है.

HAL तेजस, वैमानिकी विकास एजेंसी द्वारा विकसित और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स द्वारा निर्मित दुनिया की सबसे हल्काम सुपरसोनिक लड़ाकू है. चीन के 1964 के परमाणु परीक्षण के रूप में के रूप में अच्छी तरह से अपनी दोहराया धमकियों के लिए पाकिस्तान के 1965 के युद्ध में समर्थन में हस्तक्षेप भारत के परमाणु विकसित करने के लिए राजी अपनी खुद की हथियारों 1974 में भारत अपनी पहली परमाणु हथियारों का परीक्षण किया और आगे 1998 में भूमिगत परीक्षण किया. आलोचना और सैन्य प्रतिबंधों के बावजूद भारत न तो व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) और न ही परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर किए हैं, दोनों त्रुटिपूर्ण और भेदभावपूर्ण पर विचार भारत एक "पहले प्रयोग न करने" की परमाणु नीति रखता है और एक विकसित कर रहा है अपने'न्यूनतम विश्वसनीय शक्ति संतुलन के सिद्धांत "का एक भाग के रूप में परमाणु त्रय क्षमता यह भी एक बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा कवच विकसित कर रहा है और रूस, एक पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के साथ सहयोग में,अन्य प्रमुख स्वदेशी सैन्य विकास परियोजनाओं विक्रांत वर्ग विमान वाहक और अरिहंत वर्ग परमाणु पनडुब्बियों में शामिल हैं.

हाल ही में, भारत भी संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ आर्थिक, सामरिक और सैन्य सहयोग बढ़ गया है. 2008 में, भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच असैनिक परमाणु समझौते हस्ताक्षर किए गए थे. हालांकि समय पर भारत परमाणु हथियारों के पास है और परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के पक्ष में नहीं था, यह अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी और न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) से छूट प्राप्त है, भारत की परमाणु प्रौद्योगिकी और वाणिज्य पर पहले प्रतिबंध समाप्त . एक परिणाम के रूप में, भारत विश्व का छठा वास्तविक परमाणु हथियार राज्य बन गया है. एनएसजी छूट के बाद भारत भी रूस, सहित अन्य देशों के साथ असैनिक परमाणु ऊर्जा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर करने में सक्षम फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, और कनाडा मिलियन सक्रिय सैनिकों के साथ, भारतीय सेना दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा है. भारत की सशस्त्र सेनाओं एक भारतीय सेना, नौसेना, वायु सेना, और अर्द्धसैनिक बल, तटरक्षक, और सामरिक जैसे सहायक बलों के होते हैं. सेना कमान भारत के राष्ट्रपति भारतीय सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर है. अरब अमेरिकी डॉलर 36.03 (या सकल घरेलू उत्पाद का 1.83%) में2011 खड़ा के लिए आधिकारिक भारतीय रक्षा बजट एक 2008 SIPRI रिपोर्ट के अनुसार,भारत क्रय शक्ति के मामले में वार्षिक सैन्य खर्च अरब अमेरिकी डॉलर 72.7 पर 2011 में,खड़ा वार्षिक रक्षा बजट प्रतिशत 11.6 की वृद्धि हुई, हालांकि यह पैसा है कि सरकार की अन्य शाखाओं के माध्यम से सैन्य जाता शामिल नहीं करता है. भारत दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातक बन गया है, 9% प्राप्त सभी अंतरराष्ट्रीय हथियार स्थानान्तरण 2006 से2010 तक की अवधि के दौरान सैन्य खर्च का ज्यादातर रक्षा पर पाकिस्तान के खिलाफ केंद्रित है।

 

राज्यों के नाम निम्नवत हैं- (कोष्टक में राजधानी का नाम)

 

अरुणाचल प्रदेश (इटानगर)                 असम (दिसपुर)    उत्तर प्रदेश (लखनऊ)           उत्तराखण्ड (देहरादून)            ओडिशा (भुवनेश्वर)                                    आंध्र प्रदेश (हैदराबाद)                   कर्नाटक (बंगलोर) केरल (तिरुवनंतपुरम)          गोआ (पणजी)                       गुजरात (गांधीनगर)                            छत्तीसगढ़ (रायपुर)                    जम्मू और कश्मीर (श्रीनगर/जम्मू)                   झारखंड (रांची)                       तमिलनाडु (चेन्नई)

त्रिपुरा (अगरतला)                                 नागालैंड (कोहिमा)                                                पश्चिम बंगाल (कोलकाता)   पंजाब (चंडीगढ़†)                                      बिहार (पटना)                                    मणिपुर (इम्फाल)                                                 मध्य प्रदेश (भोपाल)           महाराष्ट्र (मुंबई)                                   मिज़ोरम (आइजोल)                               मेघालय (शिलांग)                                                 राजस्थान (जयपुर)               सिक्किम (गंगटोक)                             हरियाणा (चंडीगढ़†)                 हिमाचल प्रदेश (शिमला)

 

 

केन्द्रशासित प्रदेश

अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह(पोर्ट ब्लेयर)

चंडीगढ़†* (चंडीगढ़)

दमन और दीव* (दमन)

दादरा और नागर हवेली* (सिलवासा)

पॉण्डिचेरी* (पुडुचेरी)

लक्षद्वीप* (कवरत्ती)

दिल्ली (नई दिल्ली)

 

 चंडीगढ़ एक केंद्रशासित प्रदेश और पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों की राजधानी है।

 

                                                                                भारत में बोली जाने वाली भाषा

 

हिन्दी      अंग्रेजी     मराठी      संस्कृत    नेपाली     मैथिली    भोजपुरी   पंजाबी     तमिल    तेलुगू   

    मलयालम               कन्नड     गुजराती   बांग्ला      असमिया ओडिया या उड़ियाकश्मीरीलद्दाखीमणिपुरीकोंकणीडोगरीउर्दू 

 

 

Comments

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option type kha pa ha

(sachin bhardwaj, 2014-11-08 09:45)

kuch bhe nahi aaya

hi

(girishbhati, 2013-09-10 06:17)

lovely job

 

 

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